मानवता की सच्ची मिसाल : शीला प्रधान ने लिया देहदान का संकल्प
“मृत्यु के बाद भी किसी के काम आए शरीर, यही होगा मेरे जीवन का सच्चा मोक्ष”
महासमुंद, 03 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित दान उत्सव के बीच महासमुंद में मानवता और परोपकार की प्रेरणादायी मिसाल सामने आई है। महिला एवं बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत शीला प्रधान ने मृत्यु के बाद अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा, शोध एवं मानव कल्याण के लिए दान करने का संकल्प लिया है। उन्होंने अपना घोषणा-पत्र कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह को सौंपा।
शीला प्रधान के इस पुनीत संकल्प के लिए सेवा सेतु शिविर, कोसरंगी में उन्हें शाल, श्रीफल एवं गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्हें देहदान संकल्प का प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया।
समाज के काम आना ही जीवन की सार्थकता
इस अवसर पर शीला प्रधान ने कहा कि जीवन केवल अपने लिए जीने का नाम नहीं है, बल्कि इसकी वास्तविक सार्थकता इस बात में है कि हम किसी के काम आ सकें। उन्होंने कहा कि समाज के प्रति प्रत्येक व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपनी क्षमता के अनुसार मानवता की सेवा करे।
उन्होंने बताया कि वे अपने जीवन को परोपकार और समाजसेवा के कार्यों के लिए समर्पित करना चाहती हैं। इसी भावना से उन्होंने मृत्यु के बाद अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं मानव कल्याण के लिए दान करने का निर्णय लिया है।
शीला प्रधान ने कहा, “मेरे जाने के बाद भी यदि मेरा शरीर किसी विद्यार्थी की पढ़ाई में काम आए, चिकित्सा के क्षेत्र में ज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायक बने या किसी जरूरतमंद के काम आ सके, तो इससे बड़ी सार्थकता मेरे जीवन के लिए और क्या होगी। मेरे लिए यही असली मोक्ष होगा कि मृत्यु के बाद भी मेरा शरीर किसी के काम आए।”
कलेक्टर ने बताया प्रेरणादायी निर्णय
कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने शीला प्रधान के इस संवेदनशील एवं परोपकारी निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि देहदान का संकल्प मानव सेवा की ऐसी भावना को दर्शाता है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन के बाद भी समाज के लिए उपयोगी बने रहने की इच्छा रखता है।
परिवार और सहकर्मियों ने भी की सराहना
शीला प्रधान के इस निर्णय की उनके परिवारजनों, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों एवं करीबियों ने भी सराहना की है। उन्होंने कहा कि उनका यह कदम अन्य लोगों को भी देहदान के प्रति जागरूक होने तथा मानवता की सेवा के लिए आगे आने की प्रेरणा देगा।
देहदान का यह संकल्प इस विचार को मजबूती देता है कि सेवा की कोई अंतिम सीमा नहीं होती। जीवन के बाद भी यदि किसी व्यक्ति का शरीर चिकित्सा शिक्षा, शोध और मानव कल्याण में योगदान दे सके, तो उसकी अंतिम विदाई भी समाज के लिए एक नई सार्थकता छोड़ जाती है।
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