पिपरौद पंचायत के अभिलेखों पर घमासान! सीईओ ने जारी किए नोटिस, पूर्व सरपंच बोलीं—“संपूर्ण अभिलेख प्रभार में सौंपे जा चुके हैं”
ग्राम सभा उपस्थिति पंजी और स्वच्छ भारत मिशन की कैशबुक को लेकर मामला गरमाया, अब जांच में सामने आएंगे तथ्य
रूपानंद सोई - 94242-43631
पिथौरा। ग्राम पंचायत पिपरौद में पंचायत के महत्वपूर्ण अभिलेखों को लेकर मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। ग्राम सभा की उपस्थिति पंजी और स्वच्छ भारत मिशन की कैशबुक को लेकर उठे सवालों के बीच जनपद पंचायत पिथौरा के सीईओ सनत माहादेवा ने संबंधितों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी है। वहीं, पूर्व सरपंच श्रीमती सुलोचना पटेल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्होंने वर्तमान सचिव दिनेश कोसरिया को संपूर्ण अभिलेखों का प्रभार सौंप दिया था और अब उनके पास पंचायत से संबंधित कोई भी अभिलेख नहीं है।
पूर्व सरपंच का दावा—सभी अभिलेख सौंप दिए गए
पूर्व सरपंच श्रीमती सुलोचना पटेल का कहना है कि पंचायत के समस्त अभिलेख वर्तमान सचिव दिनेश कोसरिया को प्रभार के दौरान प्रदान कर दिए गए थे। उनके अनुसार, अब उनके पास पंचायत से संबंधित किसी भी प्रकार का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
पूर्व सरपंच के इस बयान के बाद मामले में प्रभार हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यदि सभी अभिलेख सौंपे गए थे, तो प्रभार हस्तांतरण की सूची और प्राप्ति संबंधी रिकॉर्ड से उनकी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
वर्तमान सचिव ने उठाया अभिलेखों का मुद्दा
मामले में वर्तमान सचिव दिनेश कोसरिया द्वारा ग्राम सभा की उपस्थिति पंजी और स्वच्छ भारत मिशन की कैशबुक को लेकर मुद्दा उठाया गया है। ये दोनों दस्तावेज पंचायत के कामकाज और योजना से संबंधित रिकॉर्ड के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन के लिए जरूरी है।
सीईओ सनत माहादेवा ने कहा—जांच के बाद होगी कार्रवाई
जनपद पंचायत पिथौरा के सीईओ सनत माहादेवा के अनुसार, मामले में संबंधितों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल—अभिलेखों का प्रभार किस स्थिति में सौंपा गया ?
एक ओर पूर्व सरपंच संपूर्ण अभिलेख सौंपे जाने की बात कह रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में जांच के दौरान प्रभार हस्तांतरण की सूची, प्राप्ति की पुष्टि, संबंधित अभिलेखों की उपलब्धता और पक्षकारों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे।
अब निगाहें जनपद पंचायत प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। जांच में ही स्पष्ट होगा कि संबंधित अभिलेखों का हस्तांतरण किस प्रकार हुआ, वर्तमान में उनकी स्थिति क्या है और क्या किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है।

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