नवरात के पहिली रात मां दंतेश्वरी के दरबार म गूंजिस आस्था के जयकारा ! 17 बछर ले किन्नर समाज निभावत हे चुनरी चढ़ाय के परंपरा
जगदलपुर। बस्तर के आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दरबार म नवरात के पहिली दिन आस्था के अइसन अनोखा नजारा देखे बर मिलिस, जेखर चर्चा चारों मुड़ा होवत हे। रात के करीब एक बजे किन्नर समाज के मनखे मन मां दंतेश्वरी के मंदिर पहुंचिन अउ माता रानी ला चुनरी चढ़ाके पूरा बस्तर के सुख-समृद्धि अउ खुशहाली के अरजी लगाइन।
एकर एक दिन पहिली शहर म किन्नर समाज के भव्य रैली निकलिस। गाजे-बाजे के धुन, नाचत-गावत भक्त मन के टोली अउ जय माता दी के जयकारा ले पूरा शहर भक्तिमय हो गे। उत्साह अउ उमंग के संग समाज के लोगन मन अपन बरसों पुराना परंपरा ला निभाइन।
किन्नर समाज के सदस्य मन बताइन कि ये पावन आयोजन म शामिल होय बर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिला के संग पड़ोसी राज्य ओडिशा ले घलो समाज के लोगन मन जगदलपुर पहुंचिन। हर साल के परंपरा के मुताबिक ए साल घलो माता रानी ला सबसे पहिली चुनरी चढ़ाके आशीर्वाद मांगे गिस।
समाज के लोगन मन सिरिफ अपन बर नइ, बल्कि पूरा बस्तर के खुशहाली बर अरजी लगाइन। जेन घर म संतान सुख नइ हे, ओ मन के गोदी भराय के कामना करिन। शादी-बिहाव म आ रहय बाधा दूर होवय, घर-परिवार बसय, व्यापारी मन के कारोबार म बरकत आवय अउ शहर म सुख-शांति बने रहय—ए सबो बर मां दंतेश्वरी ले आशीष मांगिन।
सुहाग के जोड़ा अउ चुनरी ले बग्घी म पहुंचिन भक्त
ए परंपरा के खास बात ये हे कि समाज के दू सदस्य मन निर्जला उपवास रखथें। उपवास करेइया दुनों सदस्य बग्घी म सवार होके चुनरी अउ सुहाग के जोड़ा ले मंदिर पहुंचथें। फेर विधि-विधान के संग मां दंतेश्वरी के पूजा-अर्चना करके माता रानी ला चुनरी चढ़ाथें।
समाज के लोगन बर ये आयोजन खाली पूजा-पाठ नइ, बल्कि आस्था, एकता अउ आपसी जुड़ाव के बड़े प्रतीक आय। साल म एक बेर होवइया ए धार्मिक जलसा बर समाज के लोगन मन म जबरदस्त उत्साह रहिथे।
पहिली कम मिलय सहयोग, अब शहरवासी मन करत हें स्वागत
किन्नर समाज के सदस्य मन बताइन कि पहिली के बखत ए आयोजन म शहरवासी मन के सहयोग कम मिलत रहिस। फेर अब बखत के संग लोगन के सोच अउ सहयोग दुनों म बदलाव आइस हे।
अब शहर के कई चौक-चौराहा म समाज के लोगन बर पानी अउ खाय-पिये के व्यवस्था करे जाथे। कई जगह आरती उतारके स्वागत अउ सम्मान घलो करे जाथे।
समाज के कहना हे कि मां दंतेश्वरी ला चुनरी चढ़ाय के ये परंपरा लगातार 17 बछर ले निभाए जात हे। हालांकि, एखर पहिली घलो समाज के बुजुर्ग मन ये परंपरा ला निभावत आइन। हर साल दूर-दराज ले समाज के लोगन के जुटना अउ माता रानी के दरबार म हाजिरी लगाना, ए परंपरा के प्रति ओ मन के गहिर आस्था ला दिखाथे।
बस्तर के आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक आस्था केंद्र म गिनाय जाथे। दंतेवाड़ा म स्थित ये मंदिर देश के 52 शक्तिपीठ मन म शामिल माने जाथे। मंदिर के निर्माण 14वीं शताब्दी के बताय जाथे।
जगदलपुर ले करीब 80 किलोमीटर अउ राजधानी रायपुर ले लगभग 350 किलोमीटर दूर स्थित ये मंदिर म सालभर भक्त मन के आना-जाना लगे रहिथे। नवरात के बेरा इहां के भक्ति, पूजा-अर्चना अउ धार्मिक परंपरा के रंग अउ गाढ़ा हो जाथे।
मां दंतेश्वरी के दरबार म किन्नर समाज के ये अरजी एकेच संदेश देथे—आस्था के कोनो सीमा नइ होवय, अउ माता के दुवारी म हर भक्त के आस अउ विश्वास के अपन अलग महत्ता रहिथे।



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