पिथौरा में कृषि विभाग के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल !
खाद वितरण में गड़बड़ी की जांच की मांग, किसानों ने सौंपा ज्ञापन; कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
पिथौरा। कृषि विभाग की कार्यप्रणाली और खाद वितरण व्यवस्था को लेकर पिथौरा में किसानों का आक्रोश सामने आया है। कथित अनियमितताओं, खाद वितरण में गड़बड़ी और एक कर्मचारी की लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापना को लेकर भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय से वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय तक मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अब सवाल यह है कि किसानों की शिकायतों पर प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है?
11 साल से एक ही जगह पदस्थापना
भारतीय किसान संघ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कृषि विभाग के विकासखंड पिथौरा कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी करीब 11 वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थापना को लेकर सवाल उठाए गए हैं। किसान संघ ने संबंधित कर्मचारी की कार्यप्रणाली और विभाग में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है।
संघ का आरोप है कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी तरह की अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, संबंधित कर्मचारी को वर्तमान पदस्थापना से हटाने की मांग भी उठाई गई है।
खाद वितरण में गड़बड़ी के आरोप
किसानों के विरोध का एक प्रमुख मुद्दा रासायनिक खाद की वितरण व्यवस्था भी है। किसान संघ ने आरोप लगाया है कि विकासखंड पिथौरा में खाद वितरण को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। ज्ञापन में यूरिया की बोरियों के वजन और वितरण व्यवस्था में कथित गड़बड़ी का उल्लेख करते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की गई है।
किसानों का कहना है कि खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद की उपलब्धता और उसका पारदर्शी वितरण बेहद जरूरी है। यदि खाद की आपूर्ति, भंडारण या वितरण में गड़बड़ी होती है, तो इसका सीधा असर किसानों की खेती और उत्पादन पर पड़ सकता है।
किसान संघ की मांग है कि खाद की खरीदी से लेकर भंडारण और वितरण तक के रिकॉर्ड की जांच हो। खाद की बोरियों के वास्तविक वजन, स्टॉक रजिस्टर, वितरण अभिलेखों और संबंधित दस्तावेजों का मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए, ताकि आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सके।
पहले भी शिकायतें, फिर भी नहीं हुई कार्यवाही
किसान संघ ने अपने ज्ञापन में दावा किया है कि संबंधित मामलों को लेकर पहले भी कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन के समक्ष शिकायतें की गई थीं। इसके बावजूद समस्याओं का संतोषजनक निराकरण नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
संघ का कहना है कि किसानों की शिकायतों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। शिकायतों में उठाए गए प्रत्येक बिंदु की जांच कर तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आए और किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
एसडीएम कार्यालय से कृषि विभाग तक किसानों का मार्च
अपनी मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने एसडीएम कार्यालय पिथौरा से वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाला। इस दौरान किसानों ने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार, खाद वितरण व्यवस्था की जांच, शिकायतों के निराकरण और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रदर्शन के बाद किसानों ने एसडीएम कार्यालय और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।
किसान संघ ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो किसान आगे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे

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