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Mahasamund : पिथौरा की देवसराल ग्राम पंचायत में ₹65.69 लाख के भुगतान की होगी जांच, सीईओ से शिकायत

 



पिथौरा की देवसराल ग्राम पंचायत में ₹65.69 लाख के भुगतान की होगी जांच, जनपद CEO को सौंपा गया आवेदन

पांच वित्तीय वर्षों के खर्च का होगा हिसाब ! स्वीकृति, बैंक लेन-देन, सामग्री खरीदी, निविदा और GeM पोर्टल के रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की उठी मांग

पिथौरा। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत देवसराल में वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच दर्ज ₹65,69,198.05 के भुगतान को लेकर प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय अभिलेखों की विस्तृत जांच कराने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पिथौरा के समक्ष आवेदन प्रस्तुत की गई है। आवेदन में पांच वर्षों के दौरान कराए गए विकास कार्यों और खरीदी गई सामग्रियों से संबंधित अभिलेखों का निष्पक्ष एवं समयबद्ध परीक्षण कराने की मांग की गई है।

पंचायती  पोर्टल से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए आवेदन में वर्षवार भुगतान का विवरण भी प्रस्तुत किया गया है। इसके अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 में ₹10,31,565.80, वर्ष 2021-22 में ₹11,84,154.67, वर्ष 2022-23 में ₹12,22,680.64, वर्ष 2023-24 में ₹20,28,484.58 तथा वर्ष 2024-25 में ₹11,02,012.36 का भुगतान दर्ज बताया गया है। इस प्रकार पांच वित्तीय वर्षों की कुल राशि ₹65,69,198.05 बताई गई है।

विस्तृत जांच की मांग
आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि पोर्टल पर दर्ज भुगतान के आधार पर किसी अनियमितता का निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित कार्यों, खरीदी और भुगतान से जुड़े मूल अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से विस्तृत जांच कराने का आग्रह किया गया है।

मूल दस्तावेज सुरक्षित रखकर जांच कराने का आग्रह
आवेदन में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पिथौरा से अनुरोध किया गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्षम अधिकारियों का जांच दल गठित किया जाए। ग्राम पंचायत देवसराल से संबंधित वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक के मूल दस्तावेजों एवं अभिलेखों को सुरक्षित अभिरक्षा में लेकर जनपद पंचायत कार्यालय में विस्तृत जांच की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

अनियमितता मिलने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
आवेदन में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान यदि वित्तीय अनियमितता, नियमों का उल्लंघन, अनियमित भुगतान, अभिलेखों में हेरफेर, शासकीय राशि के दुरुपयोग या सामग्री खरीदी में गड़बड़ी जैसी कोई बात प्रमाणित होती है, तो जांच में दोषी पाए जाने वाले संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाने की मांग की गई है।

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