छात्रावास अधीक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर 13.69 लाख की ठगी, चार लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज
बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में छात्रावास अधीक्षक के पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक सफाई कर्मचारी से 13 लाख 69 हजार रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने अनुराधा भगत, उसके पति राजकुमार लकड़ा, डॉ. प्रकाश अनंत और जोखनलाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 351(3), 61(2) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। आरोप है कि नौकरी नहीं लगने पर रकम वापस मांगने से नाराज आरोपियों ने पीड़ित को झूठे मामले में फंसाने और जान से मारने की धमकी भी दी।
15 लाख रुपये में नौकरी लगवाने का दिया था भरोसा
जानकारी के अनुसार, बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के ग्राम आमापारा निवासी संतोष कुमार सारथी, पिता छोटेलाल, स्थानीय स्कूल में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत हैं। संतोष ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में बताया कि छात्रावास अधीक्षक पद की भर्ती निकलने पर उन्होंने भी आवेदन किया था।
इसी दौरान पूर्व परिचित अनुराधा भगत ने उन्हें छात्रावास अधीक्षक के पद पर नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। इसके बदले 15 लाख रुपये की मांग की गई। संतोष ने इतनी बड़ी रकम एक साथ देने में असमर्थता जताई तो उन्हें किस्तों में नकद और बताए गए बैंक खातों में रुपये जमा करने के लिए कहा गया।
शिकायत के अनुसार, नौकरी मिलने की उम्मीद में संतोष ने अलग-अलग तारीखों पर नकद और बैंकिंग माध्यमों से रकम दी। पुलिस जांच में कुल 13 लाख 69 हजार रुपये की कथित धोखाधड़ी सामने आई है।
परीक्षा में असफल होने के बाद भी नियुक्ति का दिया आश्वासन
शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपियों ने उन्हें डॉ. प्रकाश अनंत से मिलवाने के लिए 5 जनवरी 2025 को कटघोरा स्थित मुरली होटल भी बुलाया था। वहां डॉ. प्रकाश अनंत ने नौकरी लग जाने का भरोसा दिलाया।
छात्रावास अधीक्षक भर्ती परीक्षा का परिणाम आने पर संतोष का चयन नहीं हुआ। इसके बावजूद आरोपियों ने अलग से नियुक्ति कराने का आश्वासन दिया। बाद में यह भी कहा गया कि तीसरी चयन सूची में उनका नाम आ जाएगा और नियुक्ति हो जाएगी। तीसरी सूची में भी नाम नहीं आने पर संतोष ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू कर दी।
रुपये वापस मांगने पर हत्या और झूठे केस में फंसाने की धमकी का आरोप
संतोष ने शिकायत में आरोप लगाया कि लगातार रकम वापस मांगने पर आरोपियों ने पहले यह कहकर टालमटोल की कि पैसा ऊपर अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है और वापस मिलने पर ही लौटाया जाएगा।
इसके बाद कथित तौर पर उन्हें वाहन से कुचलवाकर हत्या कराने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि अनुराधा भगत ने उन्हें बलात्कार और अन्य झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी। अनुराधा के पति राजकुमार लकड़ा के पुलिस विभाग में कार्यरत होने और आईजी कार्यालय अंबिकापुर में पदस्थ होने का उल्लेख भी शिकायत में किया गया है।
संतोष का कहना है कि उन्होंने गांव के कई लोगों से कर्ज लेकर आरोपियों को रुपये दिए थे। अब कर्ज देने वाले भी अपनी रकम वापस मांग रहे हैं, जिससे वे आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक को दो बार दी शिकायत, जांच के बाद एफआईआर
पीड़ित ने 14 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक कोरिया के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद घटना की तारीखों में संशोधन करते हुए 18 सितंबर 2026 को दूसरा शिकायत पत्र दिया गया। दोनों शिकायतों के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच की।
जांच में पुलिस ने पाया कि अनुराधा भगत, राजकुमार लकड़ा, डॉ. प्रकाश अनंत और जोखनलाल ने कथित रूप से आपराधिक षड्यंत्र के तहत एक राय होकर नौकरी दिलाने के नाम पर आवेदक से रकम प्राप्त की और धोखाधड़ी की। शिकायत में नामजद अधिवक्ता आशीष तिवारी की अपराध में संलिप्तता नहीं होने की बात आवेदक ने अपने कथन में कही है।
जांच के निष्कर्ष के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और आपराधिक षड्यंत्र सहित संबंधित धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में लिया है।
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