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Janjgir-champa : बारिश का पानी अब नहीं बहता बेकार, चेकडेम ने संवारी खेती की तकदीर

 


बारिश का पानी अब नहीं बहता बेकार, चेकडेम ने संवारी खेती की तकदीर

सरवानी में जल संरक्षण से ग्रामीणों को मिला दोहरा लाभ, रोजगार के साथ किसानों को सिंचाई का सहारा

जांजगीर-चांपा। बम्हनीडीह विकासखंड की ग्राम पंचायत सरवानी में लखाली डहर नाला पर निर्मित चेकडेम ग्रामीणों के लिए जल संरक्षण और कृषि विकास का महत्वपूर्ण साधन बन गया है। कभी बारिश के दौरान तेज बहाव के साथ बहकर निकल जाने वाला पानी अब चेकडेम में रुक रहा है। इससे नाले के आसपास की कृषि भूमि में नमी बनी रहने लगी है और किसानों को धान के साथ सब्जियों की खेती में भी सहारा मिल रहा है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्राम पंचायत सरवानी द्वारा इस चेकडेम का निर्माण कराया गया। इसके लिए 19.90 लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी, जिसमें 3.775 लाख रुपये मजदूरी तथा 16.125 लाख रुपये सामग्री मद में खर्च किए गए। निर्माण कार्य से करीब 1,444 मानव दिवस रोजगार का सृजन हुआ। यानी इस एक कार्य ने जहां ग्रामीण श्रमिकों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया, वहीं जल संरक्षण की स्थायी परिसंपत्ति भी तैयार की।

चेकडेम बनने के बाद नाले में पानी के ठहराव की अवधि बढ़ी है। पानी के धीरे-धीरे जमीन में रिसाव से आसपास की भूमि में नमी बनी रहने के साथ भू-जल स्तर को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसके अलावा मिट्टी के कटाव को कम करने और पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता बनाए रखने में भी यह संरचना उपयोगी साबित हो रही है।

रोजगार सहायक श्री धनेश्वर श्रीवास ने बताया कि चेकडेम ग्रामीणों के लिए काफी उपयोगी साबित हुआ है। इससे किसानों को खेती के लिए पानी का सहारा मिला है और निर्माण के दौरान स्थानीय श्रमिकों को रोजगार भी प्राप्त हुआ।

किसान श्री देवकुमार कर्ष ने बताया कि उनकी कृषि भूमि नाले से लगी हुई है। चेकडेम बनने से पानी रुकने के कारण खेतों में नमी बनी रही, जिससे धान की फसल लेने में मदद मिली। श्री बाबूलाल, श्री रेशम कश्यप सहित अन्य किसानों ने भी चेकडेम से मिले लाभ की जानकारी साझा की।

रोजगार भी मिला, पानी भी बचा
सरवानी का यह चेकडेम ग्रामीण विकास की उस सोच को सामने लाता है, जिसमें रोजगार सृजन के साथ जल संरक्षण और कृषि को मजबूती देने का प्रयास किया गया है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई ‘सेवा की कहानी’ यह बताती है कि जो बारिश का पानी पहले तेजी से बहकर निकल जाता था, वही अब गांव की खेती और ग्रामीण जीवन के लिए उपयोगी संसाधन बन रहा है।

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