पंचायत प्रस्ताव के एवज में 50 हजार रुपये लेने की चर्चा, गरीब महिला ने जेवर बेचकर और कर्ज लेकर जुटाई रकम
शिकायत नहीं, फिर भी मितानिन नियुक्ति की गांव से लेकर क्षेत्र तक चर्चाओं का बाजार गर्म
सरायपाली। मितानिन नियुक्ति को लेकर क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत इन दिनों चर्चाओं में है। पंचायत में पहले से कार्यरत मितानिन लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते काम नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में उनके स्थान पर नई महिला को मितानिन बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया से ज्यादा अब पंचायत प्रस्ताव के बदले कथित 50 हजार रुपये की मांग चर्चा का विषय बनी हुई है।
ग्रामीणों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार, नई मितानिन की नियुक्ति के लिए पंचायत प्रस्ताव आवश्यक था। आरोप है कि इसी प्रस्ताव के एवज में सरपंच द्वारा 50 हजार रुपये की मांग की गई। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली संबंधित महिला के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं था।
जेवर बेचकर और कर्ज लेकर जुटाई रकम
बताया जा रहा है कि महिला के पास मौजूद कुछ जेवर बेचकर तथा स्मॉल फाइनेंस बैंक से कर्ज लेकर किसी तरह 50 हजार रुपये की व्यवस्था की गई। इसके बाद कथित रूप से रकम सरपंच को दिए जाने और पंचायत प्रस्ताव प्राप्त होने की चर्चा है। प्रस्ताव मिलने के बाद मितानिन नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया जारी होने की बात कही जा रही है।
न शिकायत, न जांच... फिर भी सवाल कई
पूरे मामले में फिलहाल किसी संबंधित व्यक्ति द्वारा पुलिस या प्रशासन के समक्ष औपचारिक शिकायत किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि मामले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बावजूद इसके गांव और आसपास के क्षेत्र में कथित लेन-देन को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या मितानिन नियुक्ति के लिए पंचायत प्रस्ताव देने के एवज में किसी तरह की राशि ली जानी चाहिए? यदि वास्तव में 50 हजार रुपये का लेन-देन हुआ है तो उसकी जांच कौन करेगा और जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
जांच से साफ होगी तस्वीर
मामले में लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता संबंधित पक्षों के बयान, पंचायत के दस्तावेजों और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यदि प्रशासन मामले की जांच करता है तो पंचायत प्रस्ताव की प्रक्रिया और कथित 50 हजार रुपये के लेन-देन से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल हो सकती है।
फिलहाल नियुक्ति से ज्यादा चर्चा उस कथित रकम की है, जिसे एक गरीब महिला ने जेवर बेचकर और कर्ज लेकर जुटाया बताया जा रहा है।
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