RTI कार्यकर्ता ने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का दावा किया; स्वतंत्र जांच की मांग उठी
पिथौरा। महासमुंद जिले के पिथौरा जनपद कार्यालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर हुई नियुक्ति को लेकर सवाल उठे हैं। RTI कार्यकर्ता ने मामले की राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड से जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, जनपद कार्यालय में तकनीकी सहायक के पद पर वर्ष 2018 में अनारक्षित दिव्यांग कोटे से नियुक्ति दी गई है । उक्त नियुक्ति के लिए प्रस्तुत दिव्यांग प्रमाण पत्र को जिला मेडिकल बोर्ड, महासमुंद द्वारा 28 दिसंबर 2016 को जारी किया गया है, जिसमें 55 प्रतिशत शारीरिक अक्षमता का उल्लेख है जो कि एक पैर अक्षम है । जबकी उक्त दिव्यांग कर्मचारी पूरी तरह से स्वस्थ्य है , शारीरिक अक्षमता कहीं पर भी दिखाई नहीं देता है , प्रथम दृष्टया ही उक्त दिव्यांगता फर्जी प्रतीत होता है |
दस्तावेजों के अनुसार, उक्त प्रमाण पत्र का 21 अक्टूबर 2020 को जिला स्तरीय मेडिकल बोर्ड द्वारा नवीनीकरण भी किया गया। हालांकि, RTI कार्यकर्ता रुपानंद सोई का आरोप है कि संबंधित प्रमाण पत्र से जुड़े दस्तावेज जिला मेडिकल बोर्ड के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं। इसे लेकर उन्होंने प्रमाण पत्र की सत्यता की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है।
RTI कार्यकर्ता का कहना है कि यदि प्रमाण पत्र या नियुक्ति प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने राज्य मेडिकल बोर्ड से परीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है।
मामले में संबंधित कर्मचारी और जिला प्रशासन का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। जांच के बाद ही प्रमाण पत्र और नियुक्ति से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।

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