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Mahasamund : सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण में पिथौरा जनपद की लापरवाही! पांच साल के विकास कार्यों की जांच की मांग, लेकिन पोर्टल पर ‘पूर्व में जांच’ का हवाला देकर शिकायत बंद; जांच प्रतिवेदन तक अपलोड नहीं



सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण में पिथौरा जनपद की लापरवाही !
पांच साल के विकास कार्यों की जांच की मांग, लेकिन पोर्टल पर ‘पूर्व में जांच’ का हवाला देकर शिकायत बंद; जांच प्रतिवेदन तक अपलोड नहीं

पिथौरा। नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी निराकरण के उद्देश्य से शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज शिकायतों के निराकरण को लेकर पिथौरा जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पंचायत विभाग से संबंधित शिकायतों में समुचित जांच और ठोस कार्रवाई के बजाय औपचारिक प्रतिवेदन दर्ज कर शिकायतों को बंद किए जाने के आरोप सामने आए हैं। इससे न केवल शिकायतकर्ताओं की समस्याओं के वास्तविक निराकरण पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि पोर्टल पर दर्ज जानकारी की विश्वसनीयता भी संदेह के घेरे में है।

मामला पिथौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत ढाबाखार का है, जहां पिछले पांच वर्षों में कराए गए विकास कार्यों की विस्तृत जांच की मांग सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से की गई थी। शिकायतकर्ता ने मामले को गंभीरता से उठाते हुए जांच के दौरान स्वयं उपस्थित होकर अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष भी रखा। इसके बावजूद शिकायत के निराकरण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पांच साल के विकास कार्यों की जांच पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, ग्राम पंचायत ढाबाखार में विगत पांच वर्षों के दौरान कराए गए विकास कार्यों की विस्तृत जांच की मांग की गई थी। शिकायत पर जांच की प्रक्रिया भी शुरू हुई और शिकायतकर्ता ने जांच अधिकारियों के समक्ष अपना कथन दर्ज कराया। लेकिन सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर यह उल्लेख करते हुए शिकायत बंद कर दी गई कि संबंधित विषय की पूर्व में जांच की जा चुकी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मामले की पूर्व में जांच की गई थी, तो उस जांच का प्रतिवेदन कहां है? पोर्टल पर पूर्व में की गई जांच का हवाला तो दिया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित जांच प्रतिवेदन अपलोड नहीं किया गया। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि जांच में क्या तथ्य सामने आए, किन बिंदुओं की पड़ताल की गई और दोषियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई हुई या नहीं।

जब जांच की मांग पर ही पूर्व में जांच होने का हवाला देकर शिकायत बंद कर दी जाए और जांच प्रतिवेदन भी सार्वजनिक न हो, तो शिकायतकर्ता को न्याय मिलने की उम्मीद कैसे पूरी होगी? यह सवाल अब पूरी शिकायत निस्तारण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर खड़ा हो रहा है।

गोलमोल जवाबों से कैसे होगा शिकायतों का समाधान ?
पिथौरा जनपद पंचायत में सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज अन्य शिकायतों के निराकरण को लेकर भी इसी तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई मामलों में जांच अधिकारियों द्वारा स्पष्ट तथ्यात्मक जानकारी देने के बजाय औपचारिक और अस्पष्ट प्रतिवेदन दर्ज किए जा रहे हैं।

शिकायत में की गई मांग, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रस्तावित कार्रवाई का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने से शिकायतकर्ता यह समझ नहीं पाते कि उनकी समस्या का वास्तव में निराकरण हुआ भी है या नहीं।

यदि किसी शिकायत को केवल पोर्टल पर प्रतिवेदन दर्ज करके बंद कर दिया जाता है, लेकिन धरातल पर समस्या जस की तस बनी रहती है, तो ऐसी व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

शिकायत बंद करने से पहले स्पष्ट हो जांच और कार्रवाई का विवरण
किसी भी शिकायत का निराकरण केवल उसे पोर्टल पर बंद कर देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिकायत के निस्तारण से संबंधित टिप्पणी में जांच के निष्कर्ष, स्थल निरीक्षण की जानकारी, की गई कार्रवाई अथवा प्रस्तावित कार्रवाई, कार्रवाई की तारीख और आवश्यक होने पर निर्धारित समय-सीमा का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। शिकायतकर्ता को क्या जानकारी दी गई और उसकी समस्या का समाधान किस आधार पर माना गया, यह भी पारदर्शी होना चाहिए।

विशेष रूप से पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों से जुड़ी शिकायतों के मामलों में जांच प्रतिवेदन और कार्रवाई का विवरण महत्वपूर्ण होता है। इनके अभाव में शिकायतकर्ता के लिए यह जानना मुश्किल हो जाता है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हुई या नहीं और शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर वास्तव में कार्रवाई की गई या नहीं।

पोर्टल पर भ्रामक जानकारी दर्ज करने के आरोप, जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि शिकायतों के निराकरण के संबंध में सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर ऐसी जानकारी दर्ज की जा रही है, जिससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती। इसे शिकायतों को बंद करने के लिए भ्रामक जानकारी दिए जाने के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है।

अब सवाल यह है कि ग्राम पंचायत ढाबाखार में पिछले पांच वर्षों के विकास कार्यों की जांच वास्तव में कब और किस स्तर पर की गई? यदि जांच हुई थी, तो उसका प्रतिवेदन पोर्टल पर अपलोड क्यों नहीं किया गया? शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर क्या कार्रवाई हुई और शिकायत को बंद करने का आधार क्या था?

इन सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना जरूरी है। संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने और उन्हें पोर्टल पर बंद करने का माध्यम बनकर न रह जाए, बल्कि आम नागरिकों को वास्तविक राहत भी मिल सके।


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