रिटायरमेंट के बाद ग्रेच्युटी से वसूली पर वन विभाग को झटका, कर्मी को मिली राहत
हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मी को राहत देते हुए, कटौती की गई राशि लौटाने का दिया आदेश
रूपानंद सोई 94242-43631
पिथौरा : सेवानिवृत्ति के बाद ग्रेच्युटी से की गई वसूली को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी की कटौती या जब्ती मनमाने ढंग से नहीं की जा सकती। इसके लिए कानून में निर्धारित शर्तों का पालन अनिवार्य है। महासमुंद जिले के पिथौरा वन क्षेत्र से सेवानिवृत्त वनरक्षक मकरध्वज यादव की याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने विभागीय कार्रवाई को निरस्त कर कटौती की गई ₹1,63,464 की राशि वापस करने का निर्देश दिया है।
सेवानिवृत्ति के बाद वेतन निर्धारण में गलती बताकर काटी राशि
महासमुंद जिले के सांकरा निवासी मकरध्वज यादव 31 मार्च 2020 को वनरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद संभागीय वन अधिकारी, महासमुंद ने गलत वेतन निर्धारण का हवाला देते हुए उनकी देय ग्रेच्युटी से राशि की कटौती कर ली।
याचिकाकर्ता ने राशि वापस करने के लिए विभाग के समक्ष कई आवेदन प्रस्तुत किए, लेकिन विभाग ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की। इसके बाद उन्होंने स्थानीय अधिवक्ता बजरंग अग्रवाल के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर विभागीय कार्रवाई को चुनौती दी।
धारा 4(6) का दिया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 की धारा 4(6)(a) एवं 4(6)(b) में ग्रेच्युटी की जब्ती के लिए स्पष्ट परिस्थितियां निर्धारित हैं। इन वैधानिक परिस्थितियों के अभाव में सेवानिवृत्त कर्मचारी की ग्रेच्युटी से राशि काटना कानूनन उचित नहीं है।जबकि राज्य की ओर से याचिका का विरोध करते हुए विभाग द्वारा की गई कटौती तथा संबंधित आदेश को सही ठहराने का प्रयास किया गया।
हाईकोर्ट ने कहा—कानूनी आधार के बिना ग्रेच्युटी से कटौती नहीं
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता की सेवाएं धारा 4(6)(a) अथवा 4(6)(b) में वर्णित किसी आधार पर समाप्त नहीं की गई थीं। ऐसे में न्यायालय ने माना कि ग्रेच्युटी से राशि की वसूली के लिए अधिनियम में निर्धारित परिस्थितियां मौजूद नहीं थीं। इसलिए विभाग द्वारा की गई कटौती को वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना गया।
24 अप्रैल 2020 का आदेश निरस्त
हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल 2020 के विवादित विभागीय आदेश को निरस्त करते हुए प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की ग्रेच्युटी से काटी गई राशि उन्हें वापस की जाए।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अधिकारों के लिए अहम फैसला
हाईकोर्ट का यह फैसला सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्णय यह रेखांकित करता है कि ग्रेच्युटी कर्मचारी को कानून के तहत मिलने वाला वैधानिक लाभ है और इसकी कटौती अथवा जब्ती के लिए संबंधित कानून में निर्धारित शर्तों का पालन आवश्यक है। इस फैसले से यह संदेश भी स्पष्ट है कि सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय स्तर पर वेतन निर्धारण में बताई गई त्रुटि मात्र के आधार पर कर्मचारी की ग्रेच्युटी से वसूली नहीं की जा सकती, जब तक कानून में निर्धारित आवश्यक परिस्थितियां और प्रक्रिया पूरी न हों।
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