कांकेर में हड़ताली 155 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस, ब्रेक इन सर्विस की कार्रवाई की चेतावनी
13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं पटवारी, राजस्व विभाग के कामकाज पर पड़ रहा असर; किसानों और आम नागरिकों की बढ़ी परेशानी
उत्तर बस्तर कांकेर, 2 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए 155 पटवारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन ने सभी हड़ताली पटवारियों को सेवा में व्यवधान (ब्रेक इन सर्विस) की कार्रवाई के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही उन्हें तत्काल अपने कर्तव्य पर उपस्थित होकर शासकीय कार्यों का संपादन शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, राजस्व पटवारी संघ के आह्वान पर जिले के पटवारी 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। पटवारियों की लगातार अनुपस्थिति के कारण राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण एवं समयबद्ध शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसका सीधा असर किसानों और आम नागरिकों पर पड़ रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करने और संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में संबंधित पटवारियों के विरुद्ध प्रचलित सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिले के 175 में से 155 पटवारी हड़ताल पर
जिले के पांच राजस्व अनुविभाग कांकेर, चारामा, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ एवं पखांजूर में कुल 175 पटवारी पदस्थ हैं। इनमें से 155 पटवारी वर्तमान में हड़ताल पर हैं। हड़ताल शुरू होने के बाद से अब तक इन पटवारियों ने अपने कर्तव्यों पर उपस्थित होकर शासकीय कार्यों का संपादन शुरू नहीं किया है। इसके चलते राजस्व विभाग की नियमित गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
धान खरीदी से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य भी प्रभावित
पटवारियों की अनुपस्थिति के कारण डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस), गिरदावरी, एग्रीस्टैक पंजीयन और फसल सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसानों के भूमि एवं फसल संबंधी अभिलेखों का सत्यापन भी प्रभावित हो रहा है।
वहीं नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन तथा आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों से संबंधित जांच एवं प्रतिवेदन तैयार करने के कार्यों में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।
समय पर सत्यापन नहीं होने से किसानों की बढ़ सकती है परेशानी
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को देखते हुए किसानों की भूमि और फसल से संबंधित जानकारी का निर्धारित समय-सीमा में सत्यापन बेहद जरूरी है। गिरदावरी, एग्रीस्टैक पंजीयन और फसल सत्यापन की प्रक्रिया धान खरीदी के लिए महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में इन कार्यों में देरी होने से किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जिला प्रशासन ने हड़तालरत पटवारियों को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और लगातार अनुपस्थिति के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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