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Mahasamund : जिले में 96 हजार से अधिक पेंशनधारियों को हर माह मिल रही 4.83 करोड़ से ज्यादा की पेंशन , बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा बनी आर्थिक संबल का आधार



जिले में 96 हजार से अधिक पेंशनधारियों को हर माह मिल रही 4.83 करोड़ से ज्यादा की पेंशन
बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा बनी आर्थिक संबल का आधार
महासमुंद। समाज के जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का नियमित रूप से संचालन किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं से जिले के बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, विधवा महिलाओं सहित अन्य पात्र हितग्राहियों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता मिल रही है। पेंशन की राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से हितग्राहियों को आर्थिक संबल मिलने के साथ उनकी आत्मनिर्भरता भी मजबूत हो रही है।

जिले में सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम के तहत संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं में कुल 96 हजार 765 हितग्राही पंजीकृत हैं। इनमें से 96 हजार 254 हितग्राहियों को प्रतिमाह डीबीटी के माध्यम से कुल 4 करोड़ 83 लाख 82 हजार 500 रुपये की पेंशन राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है।

विभागीय योजनाओं के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के 32 हजार 304, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के 9 हजार 396, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के 939, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 24 हजार 109, सुखद सहारा पेंशन योजना के 9 हजार 74 तथा मुख्यमंत्री पेंशन योजना के 20 हजार 432 हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं।

राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना से भी जरूरतमंद परिवारों को राहत
इसी प्रकार राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में जून 2026 तक जिले के 56 हितग्राहियों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। प्रत्येक हितग्राही को 20 हजार रुपये की दर से कुल 11 लाख 20 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है।

डीबीटी से पारदर्शिता के साथ मिली राहत
पेंशन एवं सहायता राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से हितग्राहियों को राशि प्राप्त करने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। इससे उन्हें समय, श्रम और अतिरिक्त खर्च से राहत मिली है। नियमित रूप से मिलने वाली पेंशन राशि से बुजुर्ग और दिव्यांगजन अपनी दवाइयों, दैनिक जरूरतों तथा अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा कर पा रहे हैं। वहीं विधवा एवं जरूरतमंद महिलाओं के लिए यह राशि परिवार की आवश्यकताओं में सहयोग देने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार बन रही है।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से नियमित आर्थिक सहायता मिलने से जिले के हजारों हितग्राहियों के जीवन में आर्थिक स्थिरता आई है। पेंशन की यह सहायता उनके लिए केवल आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि सम्मान, आत्मनिर्भरता और सुरक्षित जीवन का महत्वपूर्ण सहारा भी बन रही है।

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