जांच प्रतिवेदन में ग्राम पंचायत लाखागढ़ में कराए गए कार्य वसूली योग्य नहीं पाई गई राशि
महासमुंद : जनपद पंचायत पिथौरा अंतर्गत ग्राम पंचायत लाखागढ़ में सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक के विरुद्ध आर्थिक अनियमितता तथा फर्जी दस्तावेज तैयार कर शासकीय राशि गबन किए जाने संबंधी शिकायत की जांच में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
कलेक्टर विनय लंगेह के निर्देश पर अनुविभागीय अधिकारी द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पिथौरा को मामले की जांच हेतु तीन सदस्यीय जांच दल गठित करने कहा गया था। जांच दल में सहायक लेखा परीक्षक दिनेश कुमार दीक्षित, सहायक विकास विस्तार अधिकारी लोकेश तथा तकनीकी सहायक मनरेगा त्रिलोकीनाथ सिन्हा शामिल थे। शिकायत में गौठान एवं गोधन न्याय योजना के कार्यों में लापरवाही का उल्लेख करते हुए मनरेगा कार्य में बिना कार्य कराए 11 हजार 782 रुपए तथा गोबर खरीदी में व्यय 12 हजार 654 रुपए, कुल 24 हजार 436 रुपए की राशि संबंधितों से वसूली योग्य बताया गया था।
इसके सरपंच एवं सचिव द्वारा 30 जुलाई 2024 को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। प्रतिवेदन में बताया गया कि उक्त राशि से ग्राम पंचायत लाखागढ़ के सामुदायिक पशु आश्रय शेड (गौठान) में कार्य कराया गया है। इसमें गौठान परिसर में 2 नग कोटना एवं वर्मी कम्पोस्ट शेड निर्माण कार्य कराए जाने की जानकारी दी गई। प्रतिवेदन के आधार पर जांच टीम एवं उप अभियंता द्वारा कार्य का मूल्यांकन किया गया तथा अनुविभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उप संभाग पिथौरा द्वारा भौतिक सत्यापन भी कराया गया। सत्यापन में निर्माण कार्य स्थल पर पाया गया।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार गौठान स्थल में कुल 70.27 क्विंटल गोबर रखा होना पाया गया, जिसे मौके पर तौल भी कराया गया। निरीक्षण के दौरान तीन ढेरियों में गोबर संग्रहित पाया गया, जिसकी मात्रा लगभग तीन ट्रैक्टर ट्रॉली के बराबर बताई गई। जांच अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि ग्राम पंचायत लाखागढ़ में संबंधित राशि से कार्य कराए जाने एवं भौतिक सत्यापन में कार्य पाए जाने के कारण 24 हजार 436 रुपए की राशि अब वसूली योग्य नहीं बनती है।

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