धान खरीदी में इस बार करोड़ों का फर्जीवाड़ा सामने आया है। अकेले नवागढ़ ब्लॉक में भी धान खरीदी में ढाई करोड़ की गड़बड़ी उजागर हुई है। जिसके बाद जांच के बाद करीब १७४ किसानों के द्वारा इस तरह गड़बड़ी सामने आई है। लेकिन प्रशासन इस पर मेहरबान बना हुआ है। तुलसी और किरीत सोसायटी में केवल ५ लोगों के खिलाफ ही एफआईआर की कार्रवाई अब तक हुई है।
(News Credit by Patrika)
जांजगीर-चांपा. बाकी किसानों के खिलाफ अब तक किसी तरह की कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा नहीं की जा सकी है। इधर तुलसी और किरीत सोसायटी में भी करोड़़ों का धान घोटाला करने वाले आरोपी अब तक पुलिस गिरफ्तर से बाहर हैं जिससे पुलिसिया कार्रवाई भी जांच के घेरे में नजर आ रही है। इधर फर्जीवाड़ा करने वाले किसानों के द्वारा शासन के योजनाओं का लाभ लेकर मौज किया जा रहा है। राजीव गंाधी न्याय योजना के तहत बोनस की राशि भी ऐसे किसान धड़ल्ले से उठा रहे हैं। इस पर प्रशासनिक कार्रवाई की कमी नजर आ रही है।
गौरतलब है कि जिले के नवागढ़ ब्लॉक में तुलसी, कीरित सोसायटी में करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद जिले के अफसर जांच का बहाना कर मामले में पर्दा डालने में लगे हुए हैं। तुलसी, कीरित सोसायटी में लंबे समय से फर्जीवाड़े की बू आ रही थी लेकिन अफसर जान कर भी अनजान बने हुए थे। लेकिन फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद भी मामला को दबाने में कोई कसर नही छोड़ रहे हैं। ताजा मामला यह है तुलसी, कीरित सोसायटी में जिस किसानों ने फर्जी तरीके से शासकीय जमीन को पंजीयन करके धान बेचा है उसकी पूरी राशि हजम करने के बाद राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत अंतर की राशि (बोनस) उठाकर मौज कर रहे है और जिले के प्रशासनिक अफसर मामले की जानकर भी अनजान बाहर हुए हैं, जिससे जिले के प्रशासनिक अफसरों की किरकिरी हो रही है।
गड़बड़ी उजागर होने के बाद भी मामले को दबा रहे अधिकारी
पूरे प्रदेश को देश विदेश में धान के कटोरा के नाम जे जाना जाता है, क्योंकि छत्तीसगढ़ को कृषि प्रधान प्रदेश के रूप में जाना जाता है।लेकिन यहां जांजगीर-चाम्पा जिले में फर्जी धान खरीदी उजागर होने के बाद यहां घोटाला के नाम से नाम रोशन रहा है, जिले के नवागढ़ ब्लॉक के सोसायटी में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद भी प्रशासनिक अफसर मामले को दबाने में लगे हैं। एक तरफ मीडिया में खबर आने के बाद असफरों ने दबाव में आकर मामले की जांच कराई जिसमे शुरुआत में ही करोड़ों का फर्जीवाडा का खुलासा हुआ मगर इसके बावजूद अफसरों ने टुटपुंजिए कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज करा कर टाल मटोल कर रहे हैं लेकिन तुलसी, कीरित सोसायटी में अभी फर्जीवाडा की शुरुआत हुई है और अभी बड़े फर्जीवाड़े का खुलना अभी बाकी हैं। अफसर मामले को जांच को अधर में डाल के इतिश्री कर रहे है।
बोनस की राशि लेकर सरकार को चूना लगा रहे
नवागढ़ ब्लॉक के तुलसी, कीरित सोसायटी में करोड़ों की फर्जी धान खरीदी और सरकारी जमीन की पंजीयन कर धान बेचने का मामला सामने आने के बाद अफसर आगे जांच करना उचित नहीं समझ रहे। ऐसे में धान बिक्रीे होने के बाद फर्जी किसान करोड़ों का बोनस उठा के सरकार को चुना लगा रहे है। मामला संज्ञान में आने के बाद भी अफसर जान कर अंजान बना बैठ हैं जो लोगो की समझ से परे है।
प्रशासन की खामोशी से उठ रहे कई सवाल
एक तरफ प्रदेश के मुखिया हर सरकारी काम में पारदर्शिता लाने की बात कर रहे हंै और इतने बड़े मामले में करोड़ों की फर्जी धान खऱीदी मामले को लेकर अब तक कोई बड़ी करवाई नहीं हुई है। एक तरफ अफसर कई अन्य सोसायटी की जांच की बात कह रहे हैं लेकिन नवागढ़ ब्लॉक के अन्य सोयायटी में करोड़ों की फर्जीवाडा होने की भनक अफसरों को लग गई है लेकिन अफसर शायद इससे भी बड़ी गड़बड़ी का इंतजार कर रहे हैंं।दूसरी ओर तुलसी, किरीत सोसायटी में शासकीय जमीन का पंजीयन कर करोड़ों की गड़बड़ी करने वालों को पुलिस आज तक पकड़ नहीं पा रही है। एफआईआर के बावजूद आरोपी खुले में घूम रहे हैं लेकिन विडंबना है कि पुलिस को ये नजर नहीं आ रहे। क्योंकि कानून की आंखों में पट्टी जो बंधी है।
वर्जन
मामले की जांच चल रही है। पुलिस को समस्त दस्तावेजों के साथ सबूत दे दिया गया है। इन किसानों का खाता होल्ड कर दिया गया है। इन्हें राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
अश्वनी पांडेय, नोडल आफिसर
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