Ad Code

Responsive Advertisement

Chhattisgarh : जल्द खुलेगा नार्को टेस्ट लैब, तैयारी में जुटा पुलिस विभाग






- पुलिस को अब तक लगानी पड़ रही दूसरे राज्यों की दौड़

- गृहमंत्री ने राज्य पुलिस को कहा- प्रस्ताव तैयार कर भेजें

रायपुर . छत्तीसगढ़ में जल्दी ही नार्को टेस्ट करने के लिए लैब खुलेगा। राज्य सरकार के निर्देश पर पुलिस महकमा इसकी तैयारियों में जुटा हुआ है। इसके लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। इसे स्वीकृति के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाएगी। बजट स्वीकृत होते ही इसे रायपुर के टिकरापारा स्थित एफएसएल लैब परिसर में खोलने की योजना बनाई गई है।

इसके खुलने के बाद अपराधियों से सच उगलवाने के लिए दूसरे राज्यों तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। साथ ही जांच कराने और उसके बाद रिपोर्ट के लिए महीनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लैब के शुरू होने से शातिर अपराधियों से सच उगलवाने में मदद मिलेगी। आरोपियों को दूसरे राज्य तक सुरक्षित रूप ले जाने और लाने के जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा। कोर्ट की स्वीकृति के आधार पर तुरंत जांच और उसकी रिपोर्ट भी मिल सकेगी। बता दें कि इस समय नार्को टेस्ट कराने के लिए हैदराबाद, दिल्ली, कोलकाता और अहमदाबाद तक दौड़ लगानी पडती है। इसके लिए पुलिस को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है।

क्या होता है नार्को टेस्ट
जघन्य और हाईप्रोफाइल प्रकरणों में आरोपी द्वारा जुर्म कबूल नहीं करने पर पुलिस नार्को टेस्ट करवाती है। मेडिकल प्रोफेशनल व प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मिलकर आरोपी से सच उगलवाते हैं। इसके लिए एक्सपर्ट द्वारा पहले से ही सवाल तैयार किया जाता है। इसे टेस्ट के दौरान आरोपी से पूछा जाता है। उसके द्वारा बताई गई जानकारी के आधार पर आगे की विवेचना कर साक्ष्य एकत्रित किए जाते हैं।

कोर्ट से लेनी पड़ती है इजाजत
नार्को टेस्ट कराने के पहले कोर्ट और संबंधित व्यक्ति से इजाजत लेनी पड़ती है। इसकी स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित आरोपी और संदेह के दायरे में आने वाले को कुछ दवाइयां या इंजेक्शन दिया जाता है। विशेषज्ञों की टीम उसकी शारीरिक जांच, जांच, उम्र, किसी भी तरह की बीमारी और अन्य तमाम बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए डोज की मात्रा तय करते हैं। इस देने के बाद वह अर्धचेतन अवस्था में रहता है। दवाई के असर से वह झूठ नहीं बोल पाता है। पूछताछ के दौरान उसके शरीर की प्रतिक्रिया भी देखी जाती है। हालांकि कई बार टेस्ट में दवाईयों के असर पर बेहोश हो जाने के कारण सच का पता नहीं चल पाता है।

हाइप्रोफाइल प्रकरण में उपयोग
नार्को टेस्ट का ज्यादातर उपयोग हाई प्रोफाइल केस में ही ज्यादा यूज किया जाता है। इस टेस्ट की वीडियोग्राफी होती है। नार्को टेस्ट के जरिए जो सच पुलिस उगलवाती है। इसके जरिए आरोपी को कोर्ट में सजा नहीं दिलवाई जा सकती लेकिन, उससे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस सबूत व तथ्यों की तलाश करती है। नार्को टेस्ट शुरू करने से पहले व्यक्ति को कम्प्यूटर में घटना के संबंध में फोटो और वीडियो दिखाए जाते हैं। वहीं उसके द्वारा दी गई जानकारी और शरीर की प्रतिक्रिया का संकलन किया जाता है।


लैब खुलेगा
राज्य पुलिस को नार्को टेस्ट लैब खोलने के लिए प्रस्ताव बनाने कहा गया है। इसके मिलने के बाद लैब खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- ताम्रध्वज साहू, गृहमंत्री


(News Credit by Patrika)


Ad code

ad inner footer

Ad Code

Responsive Advertisement