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सुरक्षित नहीं है आंगनबाडी भवन , नौनिहालों की जीवन खतरें में, विभाग के अधिकारीयों को नहीं है परवाह

 


                                                                             


पिथौरा। छत्तीसगढ सरकार के द्वारा नौनिहलो की सुरक्षा के साथ-साथ सम्पूर्ण विकास के दावे तो किये जा रहे है , करोंडो रुपये खर्च भी किये जा रहे हैं , लेकिन जमीनी हकिकत कुछ और है । 

दरअसल पुरा मामला जिला महासमुंद ,विकास खण्ड पिथौरा अंतर्गत ग्राम पंचायत आरंगी के ग्राम नरसैयापल्लम की है । यहां के आंगनबाडी केंद्र घने जंगलो से घिरा हुआ है , बच्चों को आंगनबाडी केंद्र में आने-जाने के लिए सुगम रास्ता भी नहीं है । मुख्य सडक से इतना डाल है की रास्ते से आने-जाने से कभी भी बच्चे चोटिल हो सकते है । 



                                                                              


 आंगनबाडी केंद्र में बाउंड्रीवाल नहीं है , चारो तरफ घने झाडीयों से घिरा हुआ है । एसे में कभी भी बडा हादसा होने की आशंका बनी रहती है । जंगली जानवर या जहरिले सांप किडे मकौडे कब आंगनबाडी केंद्र में घुस जायेंगे पता भी नहीं  चलेगा बच्चो के पालक हमेसा चिंतित एवं भयभित रहते हैं। 

आंगनबाडी केंद्र परिषर के हैण्डपम्प में  सबमर्सिबल पम्प लगाया गया है जिसका बिजली बोर्ड पेनल, स्टाटर एवं इन्सूलेटर बिना सूरक्षा के खुले में जमीन से केवल 2 फिट की उचाई में लगा हुआ है , छोटे बच्चे इसके चपेट में आने से बडा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता ।                        



बिते कई सालो से नौनिहालों की जान की परवाह किये बिना यह आंगनबाडी केंद्र संचालित है , इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को अब भी नहीं है।


     

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