फोन की घंटी बजी और 15 मिनट में तैयार हो गई पूरी व्यवस्था
अग्रवाल समाज ने पेश की सेवा, संवेदना और तत्परता की मिसाल
रूपानंद सोई - 94242-4३6३1
पिथौरा : संकट की घड़ी में समाज किस तरह बिना किसी औपचारिकता के एकजुट होकर सेवा के लिए खड़ा हो सकता है, इसका प्रेरणादायक उदाहरण अग्रवाल समाज ने पेश किया।
रात्रि करीब 10 बजे समाज के एक सदस्य के मोबाइल में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का फोन आया। सूचना मिली कि 30 अगस्त को पुराने जोंक, पुल संकरा क्षेत्र में हुई घटना के बाद लापता भागीरथी की खोजबीन के लिए अभियान चल रहा है। इस अभियान में शामिल SDRF और NDRF के करीब 60 सदस्यीय दल के ठहरने,आवश्यक व्यवस्थाओं की तत्काल आवश्यकता थी।
फोन की घंटी बजते ही अग्रवाल समाज के अध्यक्ष वेदप्रकाश गोयल के नेतृत्व में समाज के सदस्य सक्रिय हो गए। बिना समय गंवाए समाज के लोगों ने आपसी समन्वय से जवानों के रुकने,एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारियां शुरू कर दीं।
सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि महज 15 मिनट के भीतर 60 जवानों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर दी गईं। इतनी कम समयावधि में की गई यह व्यवस्था समाज की संगठन क्षमता, सेवा भावना और मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाती है।
NDRF और SDRF के जवान जहां विषम परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना लापता व्यक्ति की तलाश में जुटे हैं, वहीं उनके लिए तत्काल व्यवस्था कर अग्रवाल समाज ने यह संदेश दिया कि जो लोग समाज और मानवता की रक्षा के लिए मैदान में खड़े हैं, उनके साथ खड़ा होना भी समाज का दायित्व है।
अग्रवाल समाज की इस तत्परता की सराहना करते हुए कहा जा सकता है कि सेवा के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी है—सही समय पर उठाया गया एक छोटा-सा कदम।
अग्रवाल समाज ने रात के उस समय केवल जवानों के ठहरने की व्यवस्था ही नहीं की, बल्कि यह साबित किया कि जरूरत की घड़ी में समाज की ताकत उसकी एकजुटता और सेवा भावना में होती है।
15 मिनट में 60 जवानों की व्यवस्था—यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा और मानवीय संवेदना की प्रेरणादायक मिसाल है।
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