खरमास एक महीने तक होने के कारण 15 दिसंबर से 16 जनवरी तक शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) पर रोक लगी हुई थी। इस वजह से समाज में शादी-विवाह जैसे कार्यक्रम नहीं हो रहे थे।
रायपुर. खरमास एक महीने तक होने के कारण 15 दिसंबर से 16 जनवरी तक शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) पर रोक लगी हुई थी। इस वजह से समाज में शादी-विवाह जैसे कार्यक्रम नहीं हो रहे थे। परंतु अब 16 जनवरी से खरमास का समापन हो रहा है। इसी के साथ देवताओं का दिन प्रारंभ होने जा रहा है। इसके साथ मांगलिक कार्यक्रमों का रास्ता खुलने जा रहा है। इस महीने केवल 22, 23 और 24 जनवरी को ही मुहूर्त है। इसलिए इन्हीं तारीखों में कोरोना के कारण सीमित लोगों में वैवाहिक कार्यक्रम होंगे। मकर संक्रांति पर पहले जैसा महादेवघाट में आस्था का मेला भी नहीं लगेगा।
पंडितों के अनुसार होलाष्टक और मीनार्क होने के कारण 15 अप्रैल तक शुभ मुहूर्त नहीं बन रहा है। इसके बाद से जून तक मुहूर्त हैं। दो दिन बाद 14 जनवरी को सूर्य धनु राशि छोड़ मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मकर संक्रांति (Maka) कहा जाता है। इसके लिए तिल लड्डू बनाने से लेकर उत्सव की तैयार घर-घर चल रही हैं। परंतु इस बार कोरोना की तीसरी लहर के कारण शहर के धार्मिक महादेवघाट में मकर संक्रांति का मेला नहीं लगेगा। क्योंकि मेला, धरना, प्रदर्शन पर रोक लग चुकी है। परंतु मकर संक्रांति का पर्व पुण्य स्नान और दान के लिए विशेष फलदायी माना गया है, इसलिए लोग महादेवघाट के खारुन नदी में डुबकी लगाने के साथ दीप दान करने जरूर पहुंचेंगे।
दिनभर रहेगा पुण्यकाल
महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार 13 जनवरी को सिख समाज लोहड़ी पर्व मनाएगा। दूसरी दिन 14 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 28 मिनट पर सूर्य देव राशि परिवर्तन कर मकर राशि में प्रवेश होगा। इसी परिवर्तन को मकर संक्रांति कहा जाता है। अर्थात दिनभर पुण्यकाल रहेगा। इसलिए किसी भी समय पुण्य स्नान, दीप दान, कंबल, अन्न दान करने का फल रहेगा। इसी दिन अय्यप्पा मंदिर की पवित्र 18 सीढ़ियां खुलेंगी।
15 जनवरी को दोपहर 1 बजे तक पुण्यकाल
बोरियाकला शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख इंदुभवानंद महाराज के अनुसार 14 जनवरी को पौष शुक्ल द्वादशी तिथि, रोहिणी नक्षत्र है, परंतु काशी और ऋषिकेश पंचांग में इस दिन रात 8.59 बजे सूर्यदेव के राशि परिर्वतन का समय है। संक्रांति शेर पर सवार होकर आएगी और घोड़े पर रवाना होंगी। 15 जनवरी को सुबह से दोपहर 1 बजे तक पुण्यकाल होने से स्नान-दान करना पुण्यदायी होगा।
(Credit by Patrika)
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