सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) जनसूचना अधिकारियों की सूचना देने की बाध्यता (धारा-4)
जिले में सूचना के अधिकार की धारा 4 का अबतक पालन नहीं
सुचना का अधिकार अधिनियम 2005 जिस दिन से देश में लागू हुआ है ठीक उसके 120 दिन में उक्त अधिनियम के धारा 4 को सभी कार्यालयों में लागू करना बाध्य था। लेकिन 10 साल होने के बाद भी महासमुंद जिले में सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 का पालन नहीं हो रहा है। जबकि छत्तीसगढ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय रायपुर के द्वारा कलेक्ट महासमुंद को पत्र क्रमांक एफ-7-03/ दिनांक 13 जनवरी 2021 को आदेश जारी कर सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 4(1)(ख) में उल्लेखित 17 बिन्दुओं का स्व प्रकटीकरण किये जाने हेतु महासमुंद जिले के समस्त विभाग में इसका कडाई से पालन कराने हेतु निर्देशित किया गया है। लेकिन उक्त आदेश का पालन जिला महासमुन्द के किसी भी विभाग में नही किया जा रहा है।
आरटीआई कार्यकर्ता रूपानंद सोई ने बताया की उनके द्वारा दिनांक 13/12/2021 को जिला पंचायत महासमुंद में सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 4 (1)(ख) के तहत 17 बिन्दुओं की जानकारी मांगी गई जिसके जवाब में जनसूचना अधिकारी एस.लकङा यह कहकर आवेदन को निरस्त कर दिया गया कि आवेदक के द्वारा मांगी गई जानकारी जिला पंचायत महासमुन्द के किसी भी शाखा से संबंधित नही है एवं चाही गई जानकारी अस्पष्ट है।
इसी तरह जिले में लगभग सभी विभागों के जनसूचना अधिकारियों का रवैया आवेदनों को टालने का हो गया है। इसलिए लोगों को सूचना नहीं मिल पाती। स्वप्रकटन शासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की वृद्धि को समर्थ बनाता है और लोकतंत्र शिक्षित नागरिक वर्ग तथा ऐसी सूचना की परदर्शिता की अपेक्षा करता है जो उसके कार्यकरण तथा भ्रष्टाचार को रोकने तथा शासन के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए अनिवार्य है ।
लोक प्राधिकारियों की बाध्यताएं-
(1) प्रत्येक लोक प्राधिकारी
(क) अपने सभी अभिलेखों को सम्यक् रूप से सूचीपत्रित और अनुक्रमणिकाबद्ध ऐसी रीति और रूप में रखेगा, जो इस अधिनियम के अधीन सूचना के अधिकार को सुकर बनाता है और सुनिश्चित करेगा कि ऐसे सभी अभिलेख, जो कंप्यूटरीकृत किये जाने के लिए समुचित हैं, युक्तियुक्त समय के भीतर और संसाधनों की उपलभ्यता के अधीन रहते हुए कंप्यूटरीकृत और विभिन्न प्रणालियों पर संपूर्ण देश में नेटवर्क के माध्यम से संबद्ध है जिससे कि ऐसे आलेख तक पहुंच को सुकर बनाया जा सके।
(ख) इस अधिनियम के अधिनियमन से एक सौ बीस दिन के भीतर,
(i) अपने संगठन की विशिष्टियाँ, कृत्य और कर्तव्य
(ii) अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की शक्तियाँ और कर्तव्य
(iii) विनिश्चय करने की प्रक्रिया में पालन की जाने वाली प्रक्रिया जिसमें पर्यवेक्षण और उत्तरदायित्व के माध्यम सम्मिलित हैं
(iv) अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए स्वयं द्वारा स्थापित मापमान
(v) अपने द्वारा या अपने नियंत्रणाधीन धारित या अपने कर्मचारियों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रयोग किए गए नियम, विनियम अनुदेश, निर्देशिका और अभिलेख
(vi) ऐसे दस्तावेजों के, जो उसके द्वारा धारित या उसके नियंत्रणाधीन हैं, प्रवर्गों का विवरण
(vii) किसी व्यवस्था की विशिष्टियाँ, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं
(viii) ऐसे बोर्ड, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भागरूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोडों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठक जनता के लिए खुली होगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी, विवरण
(ix) अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशिका
(x) अपने प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक, जिसके अन्तर्गत प्रतिकर की प्रणाली भी है, जो उसके विनियमों में यथा उपबंधित हो
(xi) सभी योजनाओं, प्रस्तावित व्ययों और किए गए संवितरणों पर रिपोर्टों की विशिष्टियाँ उपदर्शित करते हुए अपने प्रत्येक अभिकरण को आवंटित बजट
(xii) सहायिकी कार्यक्रमों के निष्पादन की रीति जिसमें आवंटित राशि और ऐसे कार्यक्रमों के फायदाग्राहियों के ब्यौरे सम्मिलित हैं
(xiii) अपने द्वारा अनुदत्त रियायतों, अनुज्ञापत्रों या प्राधिकारों के प्राप्तिकर्ताओं की विशिष्टियां
(iv) किसी इलेक्ट्रानिक रूप में सूचना के संबंध में ब्यौरे, जो उसको उपलब्ध हो या उसके द्वारा धारित हों
(xv) सूचना अभिप्राप्त करने के लिए नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं की विशिष्टियां, जिनमें किसी पुस्तकालय या वाचन कक्ष के, यदि लोक उपयोग के लिए अनुरक्षित हैं तो, कार्यकरण घंटे सम्मिलित हैं
(xvi) लोक सूचना अधिकारियों के नाम पदनाम और अन्य विशिष्टियां
(xvil) ऐसी अन्य सूचना जो विहित की जाए, प्रकाशित करेगा और तत्पश्चात् इन प्रकाशनों को प्रत्येक वर्ष में अद्यतन करेगा
(ग) महत्वपूर्ण नीतियों की विरचना करते समय या ऐसे विनिश्चयों की घोषणा करते समय, जो जनता को प्रभावित करते हों, सभी सुसंगत तथ्यों को प्रकाशित करेगा:-
(घ) प्रभावित व्यक्तियों को अपने प्रशासनिक या न्यायिककल्प विनिश्चयों के लिए कारण उपलब्ध कराएगा।
(2) प्रत्येक लोक अधिकारी का निरंतर यह प्रयास होगा कि वह उपधारा (1) के खंड (ख) की अपेक्षाओं के अनुसार स्वप्रेरणा से जनता को नियमित अन्तरालों पर संसूचना के विभिन्न साधनों के माध्यम से, जिनके अन्तर्गत इंटरनेट भी है, इतनी अधिक सूचना उपलब्ध कराने के लिए उपाय करे जिससे कि जनता को सूचना प्राप्त करने के लिए इस अधिनियम का कम से कम अवलंब लेना पड़े।
(3) उपधारा (1) के प्रयोजन के लिए प्रत्येक सूचना को विस्तृत रूप से और ऐसे प्ररूप और रीति में प्रसारित किया जाएगा, जो जनता के लिए सहज रूप से पहुँच योग्य हो।
(4) सभी सामग्री को, लागत प्रभावशीलता, स्थानीय भाषा और उस क्षेत्र में संसूचना की अत्यंत प्रभावी पद्धति को ध्यान में रखते हुए प्रसारित किया जाएगा तथा सूचना, यथास्थिति केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य सूचना अधिकारी के पास इलेक्ट्रानिक रूप में संभव सीमा तक निःशुल्क या माध्यम की ऐसी लागत पर या ऐसी मुद्रण लागत कीमत पर जो विहित की जाए सहज रूप से पहुंच योग्य होनी चाहिए।
स्पष्टीकरण- उपधारा (3) और उपधारा (4) के प्रयोजनों के लिए, "प्रसारित" से सूचना पटल, समाचार पत्रों, लोक उद्घोषणाओं, मीडिया प्रसारणों, इंटरनेट या किसी अन्य माध्यम से, जिसमें किसी लोक प्राधिकारी के कार्यालयों का निरीक्षण सम्मिलित है, जनता को सूचना की जानकारी देना या संसूचित कराना अभिप्रेत है।
यह इस धारा का मूल स्वरूप था जिसे अधिनियम में प्रस्तुत किया गया है। यह लोक प्राधिकारियों पर सक्रियता से सूचना को यथासम्भव व्यापक रूप से प्रकट करने, प्रसारित करने और प्रकाशित करने का कर्तव्य भी अधिरोपित करता है। अधिनियम विधि के अधीन आच्छादित सभी प्राधिकारियों को स्वप्रेरणा से या सक्रियता से सूचना के व्यापक क्षेत्र को प्रकाशित करने की अपेक्षा भी करता है, यदि किसी ने विनिर्दिष्ट रूप से उसका अनुरोध नहीं किया है।
यह धारा सभी लोक प्राधिकारियों से नैमित्तिक रूप से सूचना के 17 संवर्गों को प्रकाशित करने की अपेक्षा करती है। यह प्रावधान स्पष्ट रूप से विनिर्दिष्ट करता है कि सभी लोक प्राधिकारियों के इन्टरनेट को शामिल करके विभिन्न माध्यमों से नियमित अन्तराल पर सामान्य जनता को स्वप्रेरणा से इतनी सूचना प्रदान करने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए, जिससे सामान्य जनता को सूचना प्राप्त करने के लिए इस अधिनियम का प्रयोग करने के लिए न्यूनतम आवश्यकता हो।
इसके अतिरिक्त लोक प्राधिकारियों द्वारा स्वप्रकटन का प्रसारण स्थानीय भाषा, लागत प्रभाव और संसूचना के अत्यधिक प्रभावी माध्यम के बारे में विचारण के साथ किया जाना चाहिए, जिससे वह नागरिकों के बड़े भाग तक पहुँचे। यह सुनिश्चित करता है कि नागरिकों की प्रमाणित, उपयोगी और सुसंगत सूचना पर सदैव पहुँच है। यह मुख्य प्रावधान है क्योंकि यह मान्यता देता है कि कुछ सूचना व्यापक रूप से समुदाय के लिए इतनी उपयोगी और महत्वपूर्ण है कि उसे नियमित रूप से किसी व्यक्ति द्वारा विनिर्दिष्ट रूप से उसके लिए अनुरोध किये बिना दिया जाना चाहिए।
स्वप्रकटन शासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की वृद्धि को समर्थ बनाता है और नागरिकों द्वारा लोक प्राधिकारियों से सूचना के लिए मांग को कम करता है क्योंकि महत्वपूर्ण सूचना में से अधिकतर सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध है।
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