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ओडिशा के मंत्री नब किशोर दास की हत्या: अब तक की कहानी

 

प्रतिकात्मक तस्वीर


News Credit by BBC

ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री नब किशोर दास की गोली मारकर हुई हत्या के बाद से ही लोगों के मन में कुछ सवाल हैं.

सवाल ये कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ने कैसे सरकार में शीर्ष पद पर बैठे मंत्री की हत्या कर दी?

हत्या की वजह क्या है?
नब किशोर दास की शख़्सियत कैसी थी और इस मामले में अब तक क्या है, जो स्पष्ट रूप से पता है.

इस कहानी में हम आपको ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश करेंगे.
हत्या कब हुई?

29 जनवरी 2023. दोपहर 12 बजे के पास का वक़्त. नब किशोर दास झारसुगुड़ा ज़िले के ब्रजराजनगर में मंत्री पंचायत समिति कार्यालय का उद्घाटन करने जा रहे थे.
गांधी चौक पर जब नब किशोर दास बाहर निकले तो लोगों को गोली चलने की आवाज़ सुनाई दी. गोली लगने से नब किशोर दास गिरने लगे. पास खड़े लोगों ने संभालने की कोशिश की. आस-पास अफरातफरी का माहौल था. नब किशोर दास की सफ़ेद शर्ट खून से लाल हो चुकी थी.

चश्मदीदों ने देखा कि एक पुलिसकर्मी भाग रहा था. घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने उसे पकड़ा.

गोली चलाने वाले की पहचान हुई. नाम- गोपाल कृष्ण दास. पद- असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर. विभाग- ओडिशा पुलिस.

गोली लगने के बाद नब किशोर दास को अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उनको बचाया नहीं जा सका. 30 जनवरी को नब किशोर दास का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया और 31 जनवरी तक राजकीय शोक का एलान किया गया.

अभियुक्त के बारे में क्या क्या पता है?
अभियुक्त पुलिसकर्मी का नाम गोपाल कृष्ण दास है.
गोपाल ने अपने करियर की शुरुआत ब्रह्मपुर में एक कॉन्स्टेबल के रूप में की थी. बाद में प्रमोशन मिला तो वो एएसआई के पद पर पहुंच गए.
ट्रांसफर होने के बाद गोपाल झारसुगुड़ा पहुंच गए. वो बीते 12 साल से झारसुगुड़ा में ही नौकरी कर रहे थे. गोपाल ब्रजराजनगर में गांधी चौक पुलिस चौकी में तैनात थे.
गोपाल की पत्नी जयंती ने टीवी चैनलों को दिए इंटरव्यू में दावा किया, ''गोपाल मानसिक रूस से बीमार थे और और उन्हें उच्च रक्तचाप भी था.''
हालांकि गोपाल कृष्ण दास का सर्विस रिकॉर्ड इस ओर इशारा नहीं करता है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक़, एक पुलिस अधिकारी ने बताया- गोपाल को पुलिस की नौकरी में रहने के दौरान 18 मेडल मिले थे और करियर में आठ बार नकद ईनाम भी दिया गया था.
झारसुगुड़ा के एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ''गोपाल को अच्छे काम के लिए 12 गुड सर्विस मार्क्स भी मिले थे. सिर्फ़ एक बार गोपाल को चेतावनी दी गई थी.''

मंत्री की हत्या का कारण पता चल पाया?
गोपाल की पत्नी जयंती ने बताया, ''स्वास्थ्य मंत्री के साथ मेरे पति की कोई दुश्मनी थी या नहीं, इसके बारे में मुझे कुछ पता नहीं है."

घटना के बाद दर्ज एफ़आईआर में कुछ और जानकारियां मिलती हैं.
ब्रजराजनगर के थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार स्वाईं ने एफ़आईआर में लिखा है, ''अभियुक्त को ट्रैफ़िक क्लीयरेंस ड्यूटी दी गई थी. मंत्री की गाड़ी रुकने के बाद वो पास आया. फिर बहुत नज़दीक से अपनी 9 एमएम सर्विस पिस्तौल से गोली चलाई.''

पुलिस एफ़आईआर में अभियुक्त के मानसिक रूप से बीमार होने का ज़िक्र नहीं है.
आधिकारिक तौर पर अब तक हत्या की वजह के बारे में कुछ बताया नहीं गया है. क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं. अभियुक्त को सस्पेंड कर दिया गया है और पुलिस पूछताछ कर रही है.

ओडिशा के पूर्व डीजीपी संजीव मारिक ने बताया, "किसी पुलिसकर्मी का एक मंत्री को गोली मारकर हत्या करने जैसी घटना कभी नहीं हुई. ऐसा पहली बार है कि ऐसी कोई घटना देखने को मिल रही है."

नब किशोर दास की राजनीति में एंट्री
2019 के ओडिशा विधानसभा चुनाव से पहले नब किशोर दास बीजू जनता दल में शामिल हुए थे. इससे पहले वो लंबे समय तक कांग्रेस के साथ जुड़े थे.

झारसुगुड़ा के वरिष्ठ पत्रकार मेहबूब महताब ने बीबीसी को बताया, "नब किशोर दास ने तीन बार विधानसभा चुनाव जीता. दो बार कांग्रेस की टिकट पर वो विधायक बने थे. राजनीति में नब किशोर दास की एंट्री संबलपुर के गंगाधर मेहर कॉलेज के दिनों में हुई. यहाँ उन्होंने क़ानून की पढ़ाई की थी और वो छात्रसंघ के सभापति जैसे पद पर भी रहे."

बाद में नब किशोर दास ओडिशा एनएसयूआई और ओडिशा यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने. नब किशोर दास 2009 में पहली बार झारसुगुड़ा से विधायक बने. कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ कर भाजपा प्रत्याशी किशोर कुमार मोहंती को उन्होंने हराया था.

नब किशोर दास और उनके परिवार के नाम कई सारे व्यवसाय उद्योग हैं. नब दास राज्य के सबसे अमीर मंत्री थे. 2021 में नब किशोर दास ने अपनी संपत्ति 34 करोड़ रुपये बताई थी. इसमें एक मर्सिडीज बेंज समेत 145 गाड़ियां भी शामिल थीं.

कारोबारी नब किशोर दास के बारे में क्या पता है?
ट्रांसपोर्ट से अपना कारोबार शुरू करने वाले नब किशोर दास ने होटल इंडस्ट्री, रियल इस्टेट में भी निवेश किया और सफल हुए.

अपनी संपत्ति के बारे में पूछे जाने पर नब किशोर दास ने कहा था, "मेरे परिवार के कई व्यवसाय हैं. मेरा बेटा भी व्यवसाय में है. हम सभी टैक्स देते हैं. एक से ज़्यादा गाड़ी रखने में क्या ग़लत है?"
नब किशोर दास के पास तीन लाइसेंसी हथियार भी थे. इनमें एक रिवाल्वर, एक डबल बैरल राइफ़ल और एक बंदूक शामिल है.

नई दिल्ली, कोलकाता, भुवनेश्वर, झारसुगुड़ा और कुछ अन्य जगहों में उनका घर है. अतीत में शक्ति कपूर और असरानी जैसे अभिनेताओं ने उनके लिए चुनावी प्रचार किया था.

नब किशोर दास से जुड़े विवाद क्या हैं?
अप्रैल 2022. नब किशोर दास के झारसुगुड़ा वाले घर में उनके 22 साल के रसोइया की मौत हो गई थी. इस केस में नब किशोर पर भी आरोप लगे थे.
ओडिशा बीजेपी ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए घटना में मंत्री के शामिल होने का आरोप लगाया था. तब बीजेडी ने मंत्री का बचाव करते हुए कहा था कि विपक्ष एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना को राजनीतिक रंग दे रहा है.
झारसुगुड़ा के वरिष्ठ पत्रकार मेहबूब महताब ने बताया, "नब किशोर दास को प्रदेश के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का क़रीबी माना जाता था. पार्टी फंड के लिए भी नब दास का अहम योगदान था. बीजू जनता दल के लिए वह क्राइसिस मैनेजर के रूप में काम करते थे. कोरोना काल में वह स्वास्थ्य मंत्री थे. लोगों को स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए उन्होंने कई क़दम उठाए."

2019 में वह स्वास्थ्य मंत्री बने और नवीन पटनायक के मंत्रिमंडल में बदलाव के बाद भी वह अपना पोर्टफ़ोलियो बरक़रार रखने में सफल हुए थे.

नब किशोर दास की मौत पर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा, "एक नेता के रूप में नब किशोर दास ने बीजू जनता दल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वह एक ज़मीनी व्यक्ति थे और सभी पार्टियों और लोगों से प्यार करते थे और उनका सम्मान करते थे."
नब किशोर दास के परिवार में पत्नी मिनती दास, एक बेटा और एक बेटी है.

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